Wednesday, 5 February 2014

हाईकु - बसंत

हाईकु - बसंत

नटी प्रकृति,
खिलखिला रही है,
बसंत आया ।

गंध -सुगंध,
महुए की मादक,
बसंत लाया ।

रूप रंग से,
नव सम्मोहन दे,
बसंत छाया ।

संकल्प सारे,
पूरे करने वाला,
बसंत भाया ।

जन -मन ने,
हर्षित होकर के,
बसंत गाया ।
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उड़े गुलाल,
ऋतु है बेमिसाल,
बसंत नाम ।

रंग -तरंग ,
घुली हवा में भंग,
बसंत जाम ।

ठण्डी पवन,
सूरज भाये मन,
बसंत धाम ।

यौवन छाया,
सबको भरमाया,
बसंत काम ।

कथा कहने,
पीताम्बर पहने,
बसंत राम ।
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भू पर छाया,
आनंद ही आनंद,
प्रकृति नाचे ।

संत हो गई,
पीली हुई सरसों,
धरती नाचे ।

झरा पलाश,
आया है मधुमास,
अम्बर नाचे ।

बदले भाव,
पल -पल में हवा,
मादक बनी ।

घट -घट में,
बसंत भर रहा,
उल्लास नया ।

-संदीप सृजन
संपादक -शब्द प्रवाह
ए- 99 वी. ड़ी.  मार्केट,
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1 comment:

  1. हाइकुओं का बसंत...वाह...अनुपम:))

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